Friday, May 17, 2024

रमेशबाबू प्रग्गनानंद (R. Praggnanandhaa) – भारत का बेहद प्रतिभाशाली और उभरता ग्रांडमास्टर।

Rameshbabu Praggnanandhaa

 

रमेशबाबू प्रग्ननानंद (Rameshbabu Praggnanandhaa) – भारत का बेहद प्रतिभाशाली और उभरता ग्रांडमास्टर।

याद कीजिए विश्वनाथ आनंद जो कि भारत के जाने-माने ग्रैंड मास्टर थे। उन्होंने अपने समय में भारत का नाम शतरंज के क्षेत्र में पूरी दुनिया में रोशन किया था। वह दो बार शतरंज का विश्व कप खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने 2002 में भारत के लिए शतरंज का विश्व खिताब जीता था। उसके अलावा उन्होंने क्षेत्र के कई खिताब अपने नाम किए। उसके बाद भारत के शतरंज में एक सूनापन आ गया था और कोई नया ग्रैंड मास्टर नहीं उभरा। लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला।

भारत को शतरंज में एक ऐसा ग्रैंडमास्टर मिल गया है, जो भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेगा। वह अद्भुत प्रतिभा का धनी है। उसकी आयु भी बेहद कम है। वह इस समय केवल 18 साल का है।

जी हाँ, अद्भुत प्रतिभा के धनी युवा ग्रैंडमास्टर का नाम है रमेशबाबू प्रग्गनानंद (Rameshababu Praggnanandhaa)

आर प्रग्गनानंद के जीवन पर एक नजर (Praggnanandhaa)

आर प्रग्गनानंद का जन्म 10 अगस्त 2005 को चेन्नई तमिलनाडु में हुआ था।

उनके पिता का नाम रमेश बाबू है जोकि टीएनएससी बैंक में बैंक मैनेजर हैंष उनकी माता का नाम नागलक्ष्मी है जोकि ग्रहणी हैंष

आर प्रग्गनानंद ने अपनी आरंभिक पढ़ाई चेन्नई के ‘वेलाम्मल मेन कैंपस’ में पूरी की।

उनकी एक बहन भी है, वह भी शतरंज के खेल में महिला ग्रैंडमास्टर और अंतरराष्ट्रीय मास्टर रह चुकी हैं। उनका नाम ‘आर. वैशाली’ है।

आर प्रग्गनानंद का करियर

आर प्रग्गनानंद शतरंज में बचपन से ही रुचि थी। उन्हें शतरंज विरासत में मिला था, यह कहा जा सकता है, क्योंकि उनकी बड़ी बहन भी आर. वैशाली भी शतरंज की ग्रैंड मास्टर रह चुकी हैं। अपनी इस प्रतिभा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में ही अपनी पहली सफलता का स्वाद चख लिया था।

वह अभिमन्यु मिश्रा, सर्गेई कारजाकिन, गुकेश डी और जवोखिर सिंदरोव के बाद ग्रैंडमास्टर (जीएम) का खिताब हासिल करने वाले पांचवें सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं।

वे 22 फरवरी 2022 को केवल 16 साल की आयु में वह वर्तमान विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। उन्होंने उस टूर्नामेंट में एयरथिंग्स मास्टर्स रैपिड शतरंज टूर्नामेंट में मैग्नस को रैपिड गेम में हराया था।

  • आर प्रग्गनानंद की सफलता का दौर तब शुरु हुआ जब उन्होने 2013 में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप  में अंडर -8 का खिताब जीता। उस समये वे केवल 7 वर्ष कुछ माह के थे।  उन्हें केवल 7 साल की उम्र में FIDE मास्टर का खिताब मिला था।
  • उसके बाद प्रग्गनानंद ने 2015 में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप का अंडर -10 का खिताब जीता।
  • 2016 में तो प्रग्गनानंद ने इतिहास रचा दिया। 2016 में वे सबसे कम उम्र के अंतर्राष्ट्रीय मास्टर बने। उन्हेोने 10 साल, 10 महीने और 19 दिन की आयु में ही अंतर्राष्ट्रीय मास्टर बनने का गौरव हासिल किया।
  • उन्होंने नवंबर 2017 में विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप में अपना पहला ग्रैंडमास्टर नार्म जीता, और 8 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे।
  • अगले साल ही 2018 में 17 अप्रेल को ग्रीस में आयोजित हेराक्लिओन फिशर मेमोरियल जीएम नॉर्म टूर्नामेंट में अपना दूसरा नार्म जीात।
  • अगले साल उर्टिजी (इटली) में ग्रेडिन ओपन में अपना तीसरा और अंतिम नार्म जीता।
  • इसी टूर्माामेंट मे 23 जून 2018 को उन्होंने आठवें दौर में लुका मोरोनी को हराकर केवल 12 साल, 10 महीने और 13 दिन की उम्र में उस समय के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रांडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया।
  • करजाकिन ग्रैंडमास्टर खिताब का 12 साल 7 महीने की उम्र में जीता था। इस तरह प्रग्गनानंद दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रांड मास्टर बने।
  • जुलाई 2019 में प्रज्ञानानंद ने 8½/10 अंक हासिल करते हुए डेनमार्क में एक्स्ट्राकॉन शतरंज ओपन जीता।
  • कुछ महीनों के बाद 12 अक्टूबर 2019 को उन्होंने अंडर-18 वर्ग में 9/11 के स्कोर के साथ विश्व युवा चैंपियनशिप जीती।
  • इसी साल दिसंबर 2019 में वह 2600 की रेटिंग हासिल करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के शतरंज खिलाड़ी बने। तब वह केवल 14 साल, 3 महीने और 24 दिन के थे।
  • अप्रेल 2021 का साल था जब प्रग्गनानंद ने युवा प्रतिभाओं के लिए आयेजित जूलियस बेयर ग्रुप और चेस.कॉम द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रोग्राम के पहले चरण मे पोल्गर चैलेंज जीता। उन्होंने अपने प्रतिस्पर्धियों से 1.5 अंक अधिक जीतकर 15.5/19 का स्कोर किया ौर 24 अप्रेल 2021 को होने वाले मेल्वाटर चैंपियंस शतरंज टूर के लिए क्वालिफाई किया।
  • मेल्टवॉटर मेल्टवॉटर चैंपियंस शतरंज टूर्नामेंट में उन्होंने 7/15 (+4-5=6)  का स्कोर करके दसवां स्थान प्राप्त किया।
  • प्रग्गनानंद ने 2021 में शतरंज वर्ल्ड कप में भाग लिया। जहां पर नौवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थे लेकिन उन्होंने दूसरे राउंड में जीएम ग्रेबियल सरगिसियन को 2–0 से हराकर तीसरे राउंड में प्रवेश किया और तीसरे राउंड में रैपिड टाइब्रेकर मे ग्रांड मास्टर माइकल क्रासेंको को हराकर राउंड 4 मे जगह बनाई लेकिन चौथे राउंड में उन्हें मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव से हार का सामना करना पड़ा।
  • 2022 में टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट 2022 का मास्टर्स सेक्शन खेला जहां पर उन्होंने एंड्री एसिपेंको, विदित गुजराती और निल्स ग्रैंडेलियस को हराया। इस टूर्नामेंट में उन्होने 5½  का स्कोर किया और 12 वां स्थान हासिल किया।
  • 2022 में 20 फरवरी को उन्होंने चैंपियंस शतरंज टूर के ऑनलाइन एयरथिंग्स रैपिड टूर्नामेंट में किसी भी समय के प्रारूप में विश्व चैपियान मैग्नस कार्सन को पहली बार हराकर इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने। उनसे पहले विश्वनाथन आनंद और हरिकृष्णा इस टूर्नामेंट को जीत चुके हैं।
  • मई 2022 में प्रग्गनानंद ने वन मास्टर्स ऑनलाइन रैपिड शतरंज टूर्नामेंट में विश्व चैंपियन मैगनस कार्लसन को 3 महीनों के अंदर लगातार दूसरी बार हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई।
  • इसी साल एफटीएक्स क्रिप्टो कप 2022 में उन्होंने विश्व चैंपियन मैगनस कार्लसन को तीसरी बार हराया। इस टूर्नामेंट में अंतिम स्टैडिंग के साथ वह मैग्नस कार्लसन के बाद दूसरे स्थान पर रहे।
  • जनवरी 2023 में प्रगग्नानंद टाटा स्टील शतरंज मास्टर्स टूर्नामेंट में ग्रैंड मास्टर डिंग लिरेन को हराया। उन्होंने 6/13 के स्कोर के साथ नौवां स्थान प्राप्त किया।

अभी अगस्त 2023चल रहे शतरंज के वर्ल्ड कप 2023 में प्रग्गनानंद ने विश्व की दूसरी वरीयता प्राप्त ग्रैंड मास्टर फैबियानो कारुआना को टाई ब्रेकर में हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई।

इस तरह शतरंज के वर्ल्ड कप में मात्र 18 वर्ष की आयु फाइनल में जगह बनाने वाले वह सबसे कम आयु के खिलाड़ी हैं।

फाइनल में उन्होंने पहले राउंड में विश्व चैंपियन मैगनस कार्लसन के साथ ड्रॉ खेला। जब  22 अगस्त 2023 को हुए पहले राउंड में दोनो प्रतिद्वंदी 35 चालों के बाद ड्रा पर सहमत हो गए।

23 अगस्त को भी उन्होंने फाइनल के दूसरे राउंड में विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन के साथ फिर ड्रा खेला जब दोनो प्रतिद्वंदी 30 चालों के बाद ड्रा पर सहमत हो गए।

24 अगस्त आर. प्रग्गानंद का मैग्नस कार्लसन से फिर टाइब्रेकर में सामना हुआ लेकिन इस बार प्रग्गानंद पाँच बार के वर्ल्ड चैंपियन मैग्नस कार्लसन से पार न पा सके और टाइब्रेकर में उन्हें कार्लसन से हार का सामना करना पड़ा। इस तरह इस होनहार युवा का पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना तो पूरा नही हो सकता लेकिन इस युवा ने सिद्ध कर दिया है कि मंजिल अभी बाकी है।

प्रग्गानंद की उम्र अभी काफी कम है और उनके सामने एक लंबा करियर है। अपनी प्रतिभा के दम पर वह विश्वनाथन आनंद के बाद भारत को फिर वर्ल्ड चैंपियन का खिताब दिला सकते हैं।

जो भी हो भारत को एक नया प्रतिभावान ग्रैंडमास्टर मिल चुका है जो आगे भविष्य में शतरंज के क्षेत्र में भारत के झंडे गाढ़ने वाला है।

 

Topic: R. Praggnanandhaa


ये भी पढ़े

चेस के वर्ल्ड कप फाइनल 2023 में आर. प्रज्ञानानंद आज खिताबी मुकाबले के लिए भिड़ेंगे।


कुछ तथ्यों का साभार

https://en.wikipedia.org/wiki/R_Praggnanandhaa

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