Wednesday, April 17, 2024

व्हाट्सएप के फेक मैसेज पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा कदम – अब व्हाट्सएप मैसेज में ओरिजनल और सबसे पहले सेंडर का पता चल सकेगा, इससे फारवर्ड किए जाने वाले फेक मैसेज पर लगाम लगेगी

व्हाट्सएप के फेक मैसेज पर लगाम लगाने के लिए सरकार का बड़ा कदम – अब व्हाट्सएप मैसेज में ओरिजनल और सबसे पहले सेंडर का पता चल सकेगा, इससे फारवर्ड किए जाने वाले फेक मैसेज पर लगाम लगेगी (WhatsApp Message first sender source reveal)

फेक आईडी के द्वारा फेक मैसेज भेजे जाने तथा फेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए  भारत सरकार ने एक नई योजना बनाई है, इसके तहत व्हाट्सएप को निर्देश दिया गया है कि वह कोई भी मैसेज भेजने वाले पहले सेंडर की पहचान (WhatsApp Message first sender source reveal) को उजागर करें। इससे किसी भी मैसेज के ओरिजिनल सेंडर का पता लगाया जा सकेगा और फेक मैसेज भेजे जाने पर लगाम लगेगी।

राजनीतिक एजेंडा के तहत अक्सर कई बार नेता आदि भी फेक मैसेज को सर्कुलेट करवाने में भागीदार होते हैं। वह जानबूझकर अपनी विरोधी पार्टी के खिलाफ फेक मैसेज सर्कुलेट करते हैं, लेकिन यह फेक मैसेज सबसे पहले कहां से भेजा गया, इसका पता नहीं चल पाता। यह फेक मैसेज फारवर्ड होता रहता है, जिसे सब सच मानकर मान लेते हैं।

अब सरकार ने व्हाट्सएप को निर्देश दिया है कि वह मैसेज के सबसे पहले ओरिजिनल सेंडर की की पहचान को उजागर करें। अब आने वाले समय में किसी भी मैसेज को प्राप्त होने पर उसके सबसे पहले ओरिजिनल सेंंडर का पता लग सकेगा। इससे यूजर को मैसेज की प्रमाणिकता को जानने में मदद मिलेगी।

हालांकि व्हाट्सएप में इस पर आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि ये यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन है। लेकिन व्हाट्स एप की ये बात गले नही उतरती। कोई यूजर कोई फारवर्डेड मैसेज किसी न किसी तो पाता ही होगा। वो उसका मित्र या जान-पहचान वाला ही होता है। तो उसकी पहचान तो यूजर को पता है। अब यदि ये फारवर्डेड मैसेज सबसे पहले कहाँ से भेजा गया इसकी पहचान उजागर होने मे कोई आपत्ति नही होनी चाहिए।

सरकार का कहना है कि यह फेक मैसेज पर लगाम लगाने के लिए अच्छा कदम है और इससे व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। व्हाट्सएप का कहना है कि यह व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी यूजर्स की प्राइवेसी उल्लंघन है, लेकिन सरकार में इस बात को नहीं माना है और सरकार का कहना है कि वह फेक मैसेज पर लगाम लगाने के लिए जितना संभव हो उतना प्रयास कर रही है। जब किसी मैसेज के ओरिजनल सेंडर का पता रहेगा तो किसी भी यूजर को उस मैसेज की विश्वसनीयता का एनालिसिस करने में मदद मिलेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इसलिए अब आने वाले समय में हो सकता है कि व्हाट्सएप के नए अपडेट में यूजर्स को किसी भी मैसेज के प्राप्त होने पर उसके पहले सेंडर के बारे में भी जानकारी प्राप्त होने का विकल्प मिल जाएगा।

इससे कोई भी फेक मैसेज को फॉरवर्ड करने से पहले 10 बार सोचेगा। यूजर को ओरिजिनल सेंडर का पता लगेगा तो इससे उसे यह भी पता अंदाजा लगाने में मुश्किल नहीं आएगी कि जो ओरिजिनल सेंडर है, उसकी प्रतिष्ठा कितनी है। उसकी प्रतिष्ठा के आधार पर यूजर मैसेज की प्रमाणिकता के बारे में आकलन कर सकता है।

सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम सही दिशा में उठाया कदम माना जा सकता है।


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